Friday, March 18, 2011

घूंघट त्यागकर विकास कार्यों में जुटें महिला सरपंच पंच

 ओढां
    तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी द्वारा 1989 में शुरू की पहल के स्वाभाविक परिणाम स्वरूप पारित 73 वें संवैधानिक संशोधन द्वारा पंचायतीराज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। और इसमें महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया तथा अनुसूचित जाति के आरक्षण में भी महिलाओं के लिए एक तिहाई स्थान आरक्षित किए गए हैं। यह शब्द हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी द्वारा आयोजित ओढ़ां खंड की महिला सरपंचों व पंचों के एक दिवसीय सम्मेलन में महिलाओं को संबोधित करते हुए संस्थान के प्रशिक्षक संदीप सहारण ने कही।
    उन्होंने बताया कि पंचायतीराज संस्थानों को स्वशासन की इकाइयां बनाने के लिए 11 वीं अनुसूचि में 29 विषय दिए गए ताकि ये संस्थाएं अधिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएं बना सकें और उन्हें लागू कर सकें। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के एक दिवसीय सम्मेलन केवल महिला सरपंचों एवं पंचों के लिए सभी ब्लॉकों में आयोजित किए जा रहे हैं। इन अवसरों पर महिलाएं बिना किसी हिचकिचाहट के खुलकर प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए अपने अधिकार व कर्तव्य समझ सकती हैं, और स्वयं मीटिंगों में भाग लेते हुए पंचायतों को सौंपे गए कार्य कर सकती हैं। इन मीटिगों में उन महिला सरपंचों व पंचों को स्वयं भाग लेने का अधिकार है उनके निकट संबंधियों को नहीं।
    हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी के पूर्व
प्रधानाचार्य एवं समन्वयक ईश्वर सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत अपने गांव के विकास के लिए वार्षिक योजना व बजट तैयार करके ग्रामसभा की सावनी की बैठक में प्रस्तुत करेंगी। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के कार्यों में सार्वजनिक स्थानों से नाजायज कब्जे हटवाना, कृषि विकास, पशुपालन को प्रोत्साहन, पीने के पानी का प्रबंध, सफाई, कमजोर वर्ग का कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को उचित ढंग से लागू करने में सहायता करना आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारी ग्राम पंचायत के साथ तालमेल रखते हुए कार्य करेंगे
    प्रशिक्षक ने बताया कि मनरेगा के अधीन एक तिहाई महिलाओं को रोजगार देना आवश्यक है और महिलाओं को भी पुरुष के बराबर मजदूरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत की एक माह में सार्वजनिक स्थान पर दो बैठकें होना आवश्यक है। प्रत्येक पंच के पास कम से कम तीन दिन पहले एजेंडा भिजवाने की जिम्मेदारी ग्राम सचिव की होती है।
खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी ओढ़ां बलराज सिंह ने कहा कि नवनिर्वाचित महिला प्रतिनिधि पूरे आत्मविश्वास के साथ सक्रियता से गांव विकास का कार्य करें। उन्होंने बताया कि मनरेगा गांव की तस्वीर बदल सकती है और आर्थिक रूप से सब सक्षम हो जाएं ऐसा ही सब चाहते हैं। इस अवसर पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी बलराज सिंह, पंचायत समिति ओढ़ां के चेयरमैन जगदेव सिंह, समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी भूप सिंह, ग्राम सचिव प्रेम कंबोज, सरपंच जसपाल कौर सिंघपुरा, मंदोरी देवी पन्नीवाला मोटा, कुलविंद्र कौर चकेरियां और राजबाला नुहियांवाली सहित खंड ओढ़ां के अनेक गांवों की महिला सरपंच व पंच उपस्थित थी।

No comments:

Post a Comment