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Friday, December 10, 2010
दिल में बसाओ
किसी को पलकों पर मत बसाओ,
क्योंकि पलकों पर तो सपने बसते हैं,
किसी को बसाना हो तो दिल में बसाओ,
क्योंकि दिल में तो अपने बसते हैं।
आशियाना
तमन्ना थी खूबसूरत आशियाना बनाने की,
मगर चल पड़ी आंधियां जमाने की,
मेरे दर्द-ए-गम को कोई समझ ना पाया,
क्योंकि मेरी आदत थी मुस्कुराने की।
चंद्रभान सिलण, कक्षा नौवीं, ख्योवाली
शेयरां दी रानी
कुज शब्द लिखे सी अपनी जिंदगी दे,
पर पता नी किवें ओह कहानी बन गई,
यार दोस्त अखां चों पढग़े नाम ओहदा,
हुण कल्ले-2 लोकां दी जुबानी बन गई,
ओसदे नाल मेरा रिश्ता ही अजीब सी,
मेरी कलम वी ओसदी दीवानी बन गई,
पहलां सुपनेयां च रही फेर दिल च रही,
ते हुण ओहो मेरे शेयरां दी रानी बन गई।
89301-29129
सोहना
सोहना हुंदा ना कोई रंग रूप पखों,
कम ना आवे तां शरीर बेकार लोको,
सोहना चलना, तकना ते हसना नी,
तार दिंदा है नेकियां दा वपार लोको,
सोहना हुंदा है जग ते ओह बंदा,
जिहदे सोहने ते उच्चे विचार लोको।
जीनूप्रीत सिद्धू, ओढ़ां
इश्क
शिखर दोपहर सी उम्रां दी,
मैं रोग इश्क दा ला बैठा,
मैंनू इश्क ने पागल कर दिता,
मैं अपना आप भुला बैठा,
मैं बनके पीड़ मुहब्बत दी,
जिंद ओहदे नां लिखवा बैठा,
मेरी हसरत चन्न नूं पौन दी सी,
पर अंबरीं उड़दा उड़दा मैं,
अज खुद धरती ते आ बैठा।
80532-86585
की होवे..
जिस आस ते खड़ी है जिंद साडी,
ओह आस ना चकनाचूर होवे,
कहना अपने आप नूं पवे दोषी,
कोई ऐना वी ना मजबूर होवे,
ओहदे हासे ते कदे ना शक करिए,
जिसदा हसना ही दस्तूर होवे,
जेहड़ा सच्चे दिलों साडी खुशी मंगे,
रब्बा खुशी ना ओहदे तों दूर होवे।
कुलवंत ए.एल.एम, ओढ़ां
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