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Friday, January 28, 2011

शाह सतनाम जी महाराज के जन्मदिन 25 जनवरी पर विशेष

      डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गुरु परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का जन्म 25 जनवरी 1919 को हरियाणा के सरसा  जिले के गांव श्री जलालआणा साहिब में हुआ। आप जी के आदरणीय पिता जी का नाम श्री वरियाम सिंह जी तथा माता जी का नाम पूज्य माता आसकौर जी था।  आप जी का बचपन का नाम श्री हरबंस सिंह जी था। लेकिन आप जी जब बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज (डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक) के पास डेरा सच्चा सौदा में आए तो मस्ताना जी महाराज ने आप जी का  नाम बदल कर शाह सतनाम जी रख दिया और आप जी के बारे वचन किए कि च्ये वोही सतनाम है जिसे मुद्दतों से दुनिया जपती है। देखा है कभी किसी ने ? जो इनके दर्शन कर लेगा वो भी नर्को में नहीं जाएगा सतनाम  कुल मालिक का नाम है। पूज्य पिता श्री वरियाम सिंह का बहुत ऊंचा घराना, बहुत बड़ा जमींदारा और घर में बेशुमार धन-सम्पत्ति थी, परंतु चिंता थी तो केवल संतान की।
    एक बार गाँव में एक फकीर का आगमन हुआ। पूज्य माता-पिता जी ने कई दिनों तक उस फकीर की दिल से सेवा की जिससे उस फकीर ने खुश होकर कहा-भगतो आपकी सच्ची-सेवा से हम बहुत खुश हैं। आप की सेवा भगवान को मंजूर है। वह आपकी संतान प्राप्ति की सच्ची हार्दिक, कामना को अवश्य पूरी करेगा। आपके घर कोई महापुरुष जन्म लेगा। इस तरह उस सच्चे फकीर की दुआ से पूज्य माता-पिता की 18 वर्ष की  प्रबल तड़प उस समय पूरी हुई जब पूज्य परम पिता जी ने 25 जनवरी 1919 को उनके यहां अवतार लिया।
    पूज्य परम पिता जी बचपन से ही दयालुता के समुद्र थे। आप जी शुरू से ही घरेलू कार्यों की बजाए परमार्थी कार्यों में अधिक रूचि लेते थे और हर सम्भव लोगों का भला करते थे। परम पूजनीय परम पिता जी जब से शहनशाह मस्ताना जी महाराज की पावन-दृष्टि में आए, पहले दिन से ही शहनशाह मस्ताना जी महाराज ने आप जी को उन्हे अपना भावी उत्तराधिकारी मान लिया था और उसी दिन से ही आप जी को अपने रूहानी नजरिए से डेरा सच्चा सौदा के दूसरे पातशाह के रूप में देखना आरंभ कर दिया था। दूनियावी नजर में पूज्य मस्ताना जी महाराज ने परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज को दिनांक 28 फरवरी 1960 को पूरे सिरसा शहर में एक बहुत ही प्रभावशाली शोभा यात्रा के द्वारा जीप में घुमाया। ताकि कुल दुनिया को पता चल जाए कि  बेपरवाह मस्ताना जी महाराज ने शाह सतनाम सिंह जी को डेरा सच्चा सौदा में अपना स्वरूप बख्श कर अपना उत्तराधिकारी  बना दिया है।
    पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने 30 वर्ष तक साध-संगत व इस पावन दरबार को अपने रहमो-कर्म के अमृत से बड़े ही प्रेम-प्यार से सींचा।
    23 सितंबर 1990 को परमपिता शाह सतनाम जी महाराज ने डेरा सच्चा सौदा की बागडोर हजूर महाराज संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को सौंपी और लगभग डेढ़ वर्ष तक साथ रहे। परमपिता जी ने अपने रूहानी कार्यक्रमों में 28 फरवरी 1960 से लेकर 23 सितंबर 1990 तक 12 लाख से अधिक लोगों को बुराईयों से दूर कर ध्यान मार्ग की युक्ति सिखाकर उनका उद्धार किया। आज उनकी पावन शिक्षाओं के अनुसार पूजनीय हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से 2.5 करोड़ से अधिक लोग नशे इत्यादि बुराईयां छोड़कर सदकर्में के मार्ग पर चल रहे हैं। इसके साथ वर्तमान में पूज्य गुरू जी ने कन्या भ्रूणहत्या, वेश्यावृति उन्मूलन तथा किन्नरों के उत्थान के लिए भी अभियान चलाया हुआ हैं,  इस अभियान के तहत पूज्य गुरू जी के आह्वान पर करीब डेढ हजार युवा आगे आए हैं, जो वेश्यावृति के दलदल को त्यागकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने वाली महिलाओं को अपना जीवन साथी बनाने के लिए तैयार हैं इसके अलावा सैंकड़ों परिवार उन लड़कियों को अपनी बेटी-बहन के रूप में अपनाने को तैयार हुए है। इसके साथ ही पूज्य गुरू जी ने सदियों से उपेक्षित किन्नर समुदाय की सुध लेते हुए किन्नर बालकों की शिक्षा की व्यवस्था की हैं।
    परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का पावन जन्म भण्डारा 25 जनवरी शाम को डेरा सच्चा सौदा में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता हे। देश-विदेश से लाखों की तादाद में श्रद्धालु इस आयोजन में शिरकत करते है। इस दौरान पूजनीय गुरू संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां मानवता भलाई के कार्यों, शिक्षा व खेलों में अव्वल रहने वाले सज्जनों को सम्मानित भी करते है।

अनुसूचित जाति के लोगों की बेटियों के विवाह के लिए वित्तीय सहायता और डिनोटिफाइड का विवरण

योजना का नाम
    लोगों की बेटियों अनुसूचित जाति और डिनोटिफाइड से संबंधित के विवाह के लिए वित्तीय सहायता

प्रायोजक  राज्य सरकार

मंत्रालय / विभाग : अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग

विवरण : विधवाओं और बेसहारा अनुसूचित जातियों, जनजातियों डिनोटिफाइड, से संबंधित महिलाओं को आय का कोई स्रोत नहीं है, और वे गरीब आर्थिक स्थिति की वजह से उनकी बेटियों के विवाह की व्यवस्था करने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इस प्रकार इस संकटग्रस्त समूह के लिए इस योजना के तहत रूपये दस हज़ार वैवाहिक मदद दिए जाते है

लाभकारी  समूह ( जिन्हें ये लाभ मिलना चाहिए ) : महिलाएं

हितलाभ के लिए योग्यता : विधवाओं और बेसहारा अनुसूचित जातियों, जनजातियों डिनोटिफाइड से संबंधित महिलाओं

कैसे प्राप्त करें
संपर्क करें : अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा का संपर्क कल्याण विभाग विभाग

योजना की वैधता
अंतिम तिथि जब जक यह मान्य है   01 / 01 / 2012

62वां गणतंत्र दिवस समारोह



    हमारा गणतंत्र दिवस भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत एवं गौरवशाली इतिहास का प्रतिबिंब है। इस उत्सव को मनाने के लिए देश का हर नागरिक सहृदय प्रेरित होता है। इस दिन हम देश के वीरों को याद करते हैं तथा उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। हर नागरिक मातृभूमि की रक्षा और उसकी समृद्धि के लिए हर संभव कार्य करने का अपना प्रण दोहराता है। तो आइए, हम मिलकर देश का गणतंत्र दिवस मनाएं.

इतिहास
    भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था तथा 26 जनवरी 1950 को इसके संविधान को आत्मसात किया गया, जिसके अनुसार भारत देश एक लोकतांत्रिक, संप्रभु तथा गणतंत्र देश घोषित किया गया।
    26 जनवरी 1950 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ झंडावंदन कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया। यह ऐतिहासिक क्षणों में गिना जाने वाला समय था। इसके बाद से हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा इस दिन देशभर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है।
    हमारा संविधान देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने की शक्ति देता है संविधान लागू होने के बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने वर्तमान संसद भवन के दरबार हॉल में राष्ट्रपति की शपथ ली थी और इसके बाद पांच मील लंबे परेड समारोह के बाद इरविन स्टेडियम में उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।
    वो सैनिक, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अतुल्य योगदान दिया है अथवा सर्वोच्च बलिदान दिया है, उन्हें इस वीरता के लिए पदकों से पुरस्कृत किया जाता है। उच्च श्रेणी की वीरता के लिए परम वीर चक्र, वीर चक्र एवं महावीर चक्र दिया जाता है। वीरता का परिचय देने वाले बच्चों को भी गणतंत्र दिवस पर बहादुरी पुरस्कार दिए जाते हैं।
    बहादुरी के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रीय पदकों की शुरुआत 1957 में भारतीय बाल कल्याण परिषद (आईसीसीडब्ल्यू) द्वारा की गई थी। आईसीसीडब्ल्यू हर वर्ष 16 साल से कम उम्र के बच्चों को चुनकर उन्हें वीरता पुरस्कार देता है।

    * पद्म सम्मान
           पदम विभूषण
           पदम भूषण
           पदम श्री
    * सुधारात्मक सेवा मेडल
    * राष्ट्रपति का विशिष्ट पुलिस सेवा पदक
    * उत्कृष्ट सेवा पदक
    * राष्ट्रपति का वीरता के लिए पुलिस पदक
    * वीरता के लिए पुलिस पदक
 

            समारोह
    गणतंत्र दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों में देश के सम्मान एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला जाता है, सैन्य शक्ति तथा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनियाभर में दिखाया जाता है।
    गणतंत्र दिवस को देशभर में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन को जिस उत्साह के साथ मनाया जाता है उसे देखकर अनेकता में एकता का कथन चरितार्थ दिखाई देता है। प्रत्येक भारतीय मातृभूमि का वंदन करता है। इससे न केवल धर्मनिरपेक्षता तथा लोकतंत्र परिलक्षित होता है बल्कि देश की समृद्ध संस्कृति, बोलियां, भाषाएं, रीति-रिवाज, परंपराएं तथा धर्मों की झलक भी मिलती है। इस वर्ष हमारा देश 62वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।
    देश का हर राज्य गणतंत्र दिवस समारोह को मनाता है। इस अवसर पर सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों, शासकीय कार्यालयों तथा संस्थानों में झंडावंदन किया जाता है तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
    इस समारोह का महा आयोजन राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में किया जाता है, जहां तीनों सेनाओं तथा रक्षा बलों द्वारा मार्च पास्ट किया जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति से होती है, जहां प्रधानमंत्री  डॉक्टर मनमोहन सिंह शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।
    भारत के राष्ट्रपति  द्वारा राष्ट्रीय ध्वज, फहराया जाता है, जिसके बाद राष्ट्रीय गान गाया जाता है तथा 21 तोपों की सलामी दी जाती है। थल सेना, नौ सेना और वायु सेना की अलग अलग रेजिमेंट राष्ट्रपति भवन की ओर से कदम ताल मिलाते हुए राजपथ पर मार्च करती हैं और इंडिया गेट पर भारत के राष्ट्रपति  को सलामी देती हैं, जो भारतीय सशस्त्र सेना के कमांडर इन चीफ भी होते हैं। इसके बाद राज्य रेजिमेंट और भारत के पैरामिलीटरी बल परेड करते हैं।
    देश के विभिन्न लोक नृत्यों, त्यौहारों, ऐतिहासिक स्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले विहंगम प्रस्तुतीकरण किए जाते हैं। विभिन्न विद्यालयों के बच्चे अलग अलग राज्यों के लोक नृत्य प्रस्तुत करते हैं जो मनोहर तथा उत्साह से भरे हुए होते हैं।
    सीमा सुरक्षा बल  के मोटरसाइकल शो जांबाज ने परेड का सबसे रोमांचक, आकर्षक एवं हैरतअंगेज करने वाला प्रदर्शन होता है। यह प्रदर्शन लयबद्ध तथा शारीरिक और मानसिक संतुलन का अद्भुत नमूना होता है।
    भारतीय वायुसेना  के जेट विमान तीन रंगों का धुआं छोड़ते हुए इस महान दिवस के मनोरम कार्यक्रम के समापन की घोषणा करते हुए गुलाब की पंखुडियां बिखेरते हैं। यह परेड के मनोरम दृश्यों में प्रमुख है।
    दूरदर्शन का राष्ट्रीय चैनल, दूरदर्शन समाचार तथा दूरदर्शन  के अन्य चैनल झंडावंदन तथा परेड सहित पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण करते हैं। आकाशवाणी भी रेडियो पर इसका सजीव प्रसारण करता है।


बीटिंग द रिट्रीट
    26 लेकर 29 जनवरी तक हर शाम राजधानी दिल्ली के सभी प्रमुख सरकारी भवनों पर रोशनी की जाती है, तथा तीसरे दिन यानी 29 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में बीटिंग द रिट्रीट समारोह का आयोजन किया जाता है।
    इस अवसर पर तीनों सेनाओं के बैंड द्वारा आकर्षक परेड की जाती है। शाम को छह बजे राष्ट्रध्वज उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तथा इसे गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन माना जाता है।

Sunday, November 21, 2010

बाल दिवस पर विशेष :पंडित जवाहर लाल नेहरू


   पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को पंडित मोती लाल नेहरू तथा श्रीमती स्वरूप रानी के घर हुआ। वे बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। सन 1916 में उनका विवाह कमला कौल से हुआ। सन 1917 में उनके घर एक लड़की पैदा हुई जिसका नाम उन्होंने इंदिरा प्रियदर्शनी रखा। 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड से नेहरू जी की आत्मा कांप उठी और वे राजनीति के संपर्क में आ गए। सन 1921 में उनको 6 मास तथा 1922 में 18 मास की कैद हुई। 26 जनवरी 1930 को रावी के किनारे झण्डा फहराते हुए उन्होंने ने स्वराज्य की मांग की।
    पंडित जवाहर लाल नेहरू उनमें से एक थे जो जीवन में सुखों को छोड़कर अपने देश व जनहित के लिए हर कष्ट सहने को तैयार रहते हैं। वे अपनी प्रतिभा के बल पर स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। वे बच्चों से बहुत प्यार करते थे इसलिए प्रतिवर्ष उनका जन्मदिन बालदिवस के रूप में मनाया जाता है। 27 मई 1964 को उस महान आत्मा का स्वर्गवास हो गया। भारत की जनता उस महान पुरुष को हमेशा याद रखेगी। 14 नवंबर को उनके जन्मदिवस पर हम उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
  

1.    सबल चहल, कक्षा पांचवी, माता हरकी देवी सीनियर सैकंडरी स्कूल ओढ़ां

    बाल दिवस
    बाल दिवस 14 नवंबर को मनाया जाता है। क्योंकि पंडित जवाहर लाल नेहरू बच्चों से बहुत प्यार करते थे अत: उनके जन्मदिन के अवसर पर बाल दिवस मनाया जाता है। इसी दिन वे हरियाणा में बच्चों से मिलने आए थे और मिठाईयां बांटी थी। जब वे देश के प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने देश के विकास हेतु अनेक योजनाएं बनाई जिन्हें लागू करके देश एक नई क्रांति की ओर अग्रसर हुआ। आज देश में बाल दिवस के उपलक्ष्य में अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं तथा विद्यालयों में बच्चों को पारितोषिक दिए जाते हैं।
        2.    अनिल कुमार, कक्षा छठी, माता हरकी देवी सी.सै. स्कूल ओढ़ां

    पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिवस जो कि बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है के अवसर पर स्कूलों के विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर बच्चों को तरह तरह के उपहार व मिठाईयां बांटी जाती हैं।
        3.    विकास कुमार, कक्षा चौथी, माता हरकी देवी सी.सै स्कूल ओढ़ां

    पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि यह बालदिवस के रूप में मनाया जाता है। चाचा नेहरू अपनी अचकन पर गुलाब का फूल लगाए रखते थे। वे भाषा की शुद्धता पर ध्यान देते थे। उनकी समाधि का नाम शांति वन है। हमारे स्कूल में प्रतिवर्ष बाल दिवस मनाया जाता है। चाचा नेहरू इस दिन बच्चों को मिठाईयां व फूल देते थे।
    मनमोहन, आर्यन डुडी, लविशा, कक्षा तीसरी, माता हरकी देवी सी.सै स्कूल ओढ़ां

    आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जिन्हें बच्चे प्यार से चाचा नेहरू पुकारते थे उनके जन्मदिवस को ही हम बाल दिवस के रूप में मनाते हैं। एक बार 14 नवंबर को उनके निवास स्थान पर बहुत भीड़ थी। बच्चों की टोलियां आई और उनका हार्दिक अभिनंदन किया। नेहरू जी बच्चों को हंसता खेलता देख मुस्कुरा उठे तथा उन्हें मुस्कुराता देख बच्चे एक साथ मिलकर कह उठे चाचा नेहरू जिंदाबाद। तब से सभी उन्हें चाचा नेहरू कहने लगे।
  नीतू गर्ग, कक्षा चौथी, माता हरकी देवी सी.सै. स्कूल ओढ़ां