Sunday, November 21, 2010

कहानी

    एक व्यापारी था जो बहुत होशियार था। वह जब सामान खरीदने जा रहा था तो रास्ते में उसे एक किसान मिला। उसने पूछा कहां जा रहे हो व्यापारी बोला सामान खरीदने जा रहा हूं। किसान बोला मैं भी वहीं जा रहा हूं तुम मुझे ले चलोगे। व्यापारी बोला आ जाओ। चलते चलते व्यापारी ने बैलगाड़ी वाले से कहा कि तुम आज गाड़ी उधर से ले चलो। बैलगाड़ी वाला बोला वो रास्ता लंबा है। व्यापारी बोला इधर पानी खड़ा है तुम उधर से चलो। गाड़ी वाला बोला ठीक है मालिक। चलते-2 रास्ते में एक नदी आ गई। वहां पर 4 नाव थी और उनमें 4 आदमी भी थे। किसान ने देखा कि पानी काफी तेज है इसलिए उसने पहले नाव वाले से पूछा तुम्हें तैरना आता है वो बोला हां तैरने में मैं सबसे तेज हूं। किसान उसकी नाव में बैठ गया। व्यापारी ने दूसरे से पूछा वो बोला मुझे तैरना आता है, तीसरे से पूछा वो बोला तैरना नहीं आता व्यापारी उसकी नाव में बैठ गया। बताओ व्यापारी न तैरने वाले की नाव में क्यों बैठा?
            मनदीप, माता हरकी देवी सी.सै. स्कूल ओढ़ां

कविता : हम हैं भारत के जवान

    हम हैं भारत के जवान, हमारा भारत है महान,
    इस धरती के हम हैं मोती, हम जलाते शिक्षा की ज्योति,
    मिल-जुलकर रहते हैं हम, हमें नहीं छूता कोई गम,
    आपस में हम खुशियां बांटें, छोटों को हम कभी ना डांटें,
    ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाते, पर्यावरण को स्वच्छ बनाते,
    हम हैं भारत के जवान, हमारा भारत है महान।।
       
सुनिधि, कक्षा चौथी, माता हरकी देवी सी.सै. स्कूल ओढ़ां

बाल दिवस पर विशेष :पंडित जवाहर लाल नेहरू


   पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को पंडित मोती लाल नेहरू तथा श्रीमती स्वरूप रानी के घर हुआ। वे बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। सन 1916 में उनका विवाह कमला कौल से हुआ। सन 1917 में उनके घर एक लड़की पैदा हुई जिसका नाम उन्होंने इंदिरा प्रियदर्शनी रखा। 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड से नेहरू जी की आत्मा कांप उठी और वे राजनीति के संपर्क में आ गए। सन 1921 में उनको 6 मास तथा 1922 में 18 मास की कैद हुई। 26 जनवरी 1930 को रावी के किनारे झण्डा फहराते हुए उन्होंने ने स्वराज्य की मांग की।
    पंडित जवाहर लाल नेहरू उनमें से एक थे जो जीवन में सुखों को छोड़कर अपने देश व जनहित के लिए हर कष्ट सहने को तैयार रहते हैं। वे अपनी प्रतिभा के बल पर स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। वे बच्चों से बहुत प्यार करते थे इसलिए प्रतिवर्ष उनका जन्मदिन बालदिवस के रूप में मनाया जाता है। 27 मई 1964 को उस महान आत्मा का स्वर्गवास हो गया। भारत की जनता उस महान पुरुष को हमेशा याद रखेगी। 14 नवंबर को उनके जन्मदिवस पर हम उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
  

1.    सबल चहल, कक्षा पांचवी, माता हरकी देवी सीनियर सैकंडरी स्कूल ओढ़ां

    बाल दिवस
    बाल दिवस 14 नवंबर को मनाया जाता है। क्योंकि पंडित जवाहर लाल नेहरू बच्चों से बहुत प्यार करते थे अत: उनके जन्मदिन के अवसर पर बाल दिवस मनाया जाता है। इसी दिन वे हरियाणा में बच्चों से मिलने आए थे और मिठाईयां बांटी थी। जब वे देश के प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने देश के विकास हेतु अनेक योजनाएं बनाई जिन्हें लागू करके देश एक नई क्रांति की ओर अग्रसर हुआ। आज देश में बाल दिवस के उपलक्ष्य में अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं तथा विद्यालयों में बच्चों को पारितोषिक दिए जाते हैं।
        2.    अनिल कुमार, कक्षा छठी, माता हरकी देवी सी.सै. स्कूल ओढ़ां

    पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिवस जो कि बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है के अवसर पर स्कूलों के विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर बच्चों को तरह तरह के उपहार व मिठाईयां बांटी जाती हैं।
        3.    विकास कुमार, कक्षा चौथी, माता हरकी देवी सी.सै स्कूल ओढ़ां

    पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि यह बालदिवस के रूप में मनाया जाता है। चाचा नेहरू अपनी अचकन पर गुलाब का फूल लगाए रखते थे। वे भाषा की शुद्धता पर ध्यान देते थे। उनकी समाधि का नाम शांति वन है। हमारे स्कूल में प्रतिवर्ष बाल दिवस मनाया जाता है। चाचा नेहरू इस दिन बच्चों को मिठाईयां व फूल देते थे।
    मनमोहन, आर्यन डुडी, लविशा, कक्षा तीसरी, माता हरकी देवी सी.सै स्कूल ओढ़ां

    आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जिन्हें बच्चे प्यार से चाचा नेहरू पुकारते थे उनके जन्मदिवस को ही हम बाल दिवस के रूप में मनाते हैं। एक बार 14 नवंबर को उनके निवास स्थान पर बहुत भीड़ थी। बच्चों की टोलियां आई और उनका हार्दिक अभिनंदन किया। नेहरू जी बच्चों को हंसता खेलता देख मुस्कुरा उठे तथा उन्हें मुस्कुराता देख बच्चे एक साथ मिलकर कह उठे चाचा नेहरू जिंदाबाद। तब से सभी उन्हें चाचा नेहरू कहने लगे।
  नीतू गर्ग, कक्षा चौथी, माता हरकी देवी सी.सै. स्कूल ओढ़ां
   

अनमोल वचन

    *दुनिया का सबसे कीमती जेवर आपकी अपनी मेहनत है।
    *जो हाथ सेवा के लिए उठते हैं वे प्रार्थना करते हाथों से पवित्र होते हैं।
    *स्वार्थ में अच्छाईयां ऐसे खो जाती हैं जैसे समुंद्र में नदियां।
    *मेहनत से कमाया धन हर प्रकार से सुख देता है।
    *छल कपट से कमाया धन दु:ख ही दु:ख देता है।
            प्रतिमा सिंह, ओढ़ां 

आपके एसएमएस

आपके एसएमएस

हर इक जज्बात को जुबां नहीं मिलती,
हर इक आरजू को दुआ नहीं मिलती,
मुस्कान बनाए रखो तो दुनिया है वर्ना,
आंसूओं को आंखों में पनाह नहीं मिलती।
    सुभाष नागर, पन्नीवाला मोटा

नसीबां दे लेख कोई मोड़ नहीं सकदा,
रब्ब ते एतबार कोई तोड़ नहीं सकदा,
दुनिया च दोस्त मिलदे तकदीरां नाल,
हर कोई एह रिश्ते जोड़ नहीं सकदा।
    प्रकाश सिंह, घुकांवाली

क्या बनाने आए थे क्या बना बैठे,
कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे,
हमसे तो परिंदों की जात अच्छी है,
कभी मंदिर पे जा बैठे कभी मस्जिद पे जा बैठे।
        94161-57052

ये जिंदगी भी न जाने कितने मोड़ देती है,
हर मोड़ पर हमें कुछ नए सवाल देती है,
ढूंढ़ते रहते हैं हम जिनका जवाब जिंदगी भर,
पर जवाब मिल जाए तो सवाल बदल देती है।
        95417-98474

खुदा हमको ऐसी जुदाई ना दे,
तेरी यादों से हमें रिहाई ना दे,
मुझे ऐसी जन्नत नहीं चाहिए जहां से,
मुझे मेरा ये दोस्त दिखाई ना दे।
        94683-11784

ए खुदा नजरों को कुछ ऐसी खुदाई दे,
जिधर देखूं उधर वो ही दिखाई दे,
काश ऐसी मेहरबानी हो आज हवा में,
उसको पुकारूं और उसी को सुनाई दे।
        98964-80020

हर इंसान की अलग पहचान होती है,
हमारे एसएमएस की अलग ही शान होती है,
हर किसी को हम एसएमएस नहीं करते,
जिसे करते हैं उनमें हमारी जान होती है।
        99969-62772

ख्वाहिशों को दबाना गलत है,
यूंही किसी को सताना गलत है,
दुश्मन हैं वो इंसानियत के जो,
कहते हैं कि दिल लगाना गलत है।
        94673-64088

मजबूरियों को हम आंखों में छुपा लेते हैं,
हम कहां रोते हैं हालात रूला देते हैं,
हम तो हर पल याद करते हैं उनको,
पर वो याद ना करने का इलजाम लगा देते हैं।
        94663-32235

अमिताभ बच्चन और प्राण
दोनों बस स्टाप पर खड़े थे।
बस आई प्राण उसमें चढ़ गए
पर अमिताभ खड़े रहे, क्योंकि
प्राण जाए पर वचन ना जाए।
        80533-42046

प्रीतो संते नाल बाजार जांदी होई बोली
अज तां तुसीं बिल्कुल मदारी लग रहे हो।
संता-जिहदे नाल तेरे वरगी बांदरी जांदी
होवे होर की ओह साला डीसी लगूगा?
        78764-63984

आओ झुककर सलाम करें हम उनको,
जिनकी हिम्मत से ये मुकाम आता है,
बड़े खुशनसीब होते हैं वो लोग,
जिनका लहू वतन के काम आता है।
        72061-87763

मुस्कुराती आंखों से अफसाना लिखा था,
शायद आपका जिंदगी में आना लिखा था,
जरा तकदीर तो देखो मेरे इन आंसूओं की,
इनका आपकी याद में बह जाना लिखा था।
        95419-42633

संता को वोडाफोन में आप्रेटर की जॉब मिली।
पहले दिन उसे मार मार कर निकाल दिया गया।
क्योंकि जब किसी उपभोक्ता ने कहा कि उसका
वोडाफोन का सिम खराब हो गया है तो उससे
संता बोला कि पागल ऐसा है तो एयरटेल लेले।
        92155-66405

जीवन ते जवानी इक बार औंदे ने,
रूखां ते हरियाली कई बार औंदी ए,
इक तूं ही नहीं औंदा साडे कोल कदे,
पर तेरी याद दिन विच लख औंदी ए।
        95419-42633

दोस्ती इम्तिहान नहीं केवल प्यार मांगती है,
नजर तो अपने दोस्त का दीदार मांगती है,
अपने लिए ये जिंदगी कुछ भी नहीं लेकिन,
आपकी जिंदगी के लिए दुआ हजार मांगती है।
        99960-64139

आपकी मुस्कान हमारी कमजोरी है,
कुछ कह ना पाना हमारी मजबूरी है,
आप क्यूं नहीं समझते इस खामोशी को,
क्या खामोशी को जुबान देना जरूरी है?
        94164-04250

अपने एसएमएस 94160-95179 या 96716-63006 पर भेजें।
नोट—एसएमएस के साथ अपना पूरा नाम और गांव का नाम अवश्य
लिखें तथा एक सप्ताह में अपने एक या दो चुनींदा एसएमएस ही भेजें
अन्यथा आपके एसएमएस प्रकाशित नहीं हो पाएंगे।   सतीश गर्ग

यह कैसा बाल दिवस, शिक्षा से पहले रोटी की चिंता

ओढां (चानन सिंह )  शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया है और छह से चौदह वर्ष की आयु के बच्चों को निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा देने के लिए कानून में संशोधन कर इसे लागु किया गया है लेकिन जमीनी स्तर पर यह कानून सरकार व प्रशासन के लिए एक योजना बनाकर ही न रह जाए इसके लिए कार्यपालिका व वयवस्था में सामंजस्य बनाकर इस दिशा में कठोर निर्णय लेने होंगे ! सरकार ने जगह जगह बाल भवन निर्माण करवा रखे है और प्रतिवर्ष बालदिवस मनाया गता है तथा बच्चो के लिए नई  नई योजनायें बनाई जाती है लेकिन आज भी गावों व शहरों में कचरा बीनने, ढाबों, होटलों व भट्ठों पर बाल मजदूरी का नज़ारा सरकार भी देखती है और प्रशासन भी ! जो उम्र पढने लिखने, खेलने व मौज मस्ती की होती है उस आयु में बच्चे मज़बूरीवश खेतों, होटलों, लघु उद्योगों व दुकानों आदि में अपना बचपन खो रहे है ! जिले में बिहार उत्तरप्रदेश व राजस्थान से आये बच्चों को शिक्षा से पहले दो वक्त की रोटी की चिंता होती है जो उन्हें दिन भर काम करने के बाद मिलती है ! श्रम विभाग के अधिकारी व प्रशासन समय समय पर बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्ति दिलाने हेतु अभियान चलते हैं लेकिन फिर भी इन बच्चों का बाल मजदूरी के तहत शोषण होता है तथा अब तक इन्हें स्कूलों तक नहीं पहुंचाया जा सका है ! इस प्रकार सरकार व प्रशासन की कार्यप्रणाली व सरकारी योजनाओं की सफलता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है ! सरकार समय समय पर बाल कल्याणकारी योजनायें चलाती है लेकिन फिर भी बच्चे कचरा बीनते और इंट भट्ठों व ढाबों पर काम करते मिल जाते हैं क्योंकि सभी सुविधाओं व योजनाओं का लाभ इन्हें नहीं मिल पाता ! प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील, निशुल्क पुस्तकें, छात्रवृति, इंट भट्ठों पर शिक्षा देने जैसी अनेक योजनाओं जो हश्र हो रहा है वो सबके सामने है !
हमारे देश की सरकार, सामाजसेविओं व सामाजिक संस्थाओं को आगे आकर इस बाल शोषण के अभिशाप को मिटाना होगा तथा अभिभावकों को भी जागरूक होना होगा तभी हम समाज को इस कलंक से बचा सकते हैं !

हमारी माटी

हमारी माटी एक क्षेत्रीय साप्ताहिक समाचार  पत्र है